PYARI SI GUDIYA

प्यारी सी गुड़िया...

BY AMIT ANANT

उसके आँखों से आँसू निकलते रहे।
उसके साथ साथ में सब चलते रहे।
कोई पूछने वाला नही दिखा उसको,
उसके आस पास से सब निकलते रहे।।

   PYARI SI GUDIYA...2013 नवरात्रि के अष्टमी का दिन था मैं शाम को 6 बजे ऑफिस से अपने घर के लिए निकला और  मोटरसाइकिल से और जैसे ही थोड़ी दूर गया मेरे मित्र का फोन आया कि भैया इधर से आना माँ जी को कोई काम है।तो उनको समझा देना।
       PYARI SI GUDIYA...तो मैं वहां 30 मिनट की दूरी पर मित्र के घर चला गया और आंटी से मिल कर आंटी ने जो पूछा उनको समझाया।और फिर चाय नास्ता करके करीब 9 बजे वहां से घर के लिए निकला और करीब 20 मिनट बाद हम अपने क्षेत्र में आ चुके थे बस वहाँ से 2 किलोमीटर की दूरी पर मेरा घर था।
     PYARI SI GUDIYA...तो एक जगह रास्ते के बिल्कुल बराबर में बहुत बड़े मैदान में मेला लगा हुआ था...तो वहां रोड पर भीड़ ज्यादा थी तो मैं धीरे धीरे ही मोटरसाइकिल से चल रहा था जैसे ही भीड़ को पार करके 500 मीटर आगे गया तो देखा कि एक अकेली छोटी 4 या 5 की साल की बच्ची तेज स्वर में रोते हुए रोड के किनारे किनारे मम्मी-मम्मी करते जा रही थी।
     PYARI SI GUDIYA...तब मैंने देखा कि आस पास से बहुत लोग आ जा रहे है परन्तु कोई उसकी तरफ ध्यान नही दे रहा था। तो लगभग 2 मिनट तक मोटरसाइकिल धीमी करके उसके साथ चला मैंने सोचा शायद कोई आगे पीछे होगा तो आके रोकेगा परन्तु फिर भी...कोई उसको रोकने या पूछने वाला नही आया...टाइम भी तकरीबन 9:30का था और ठण्ड भी हो रही थी।


      PYARI SI GUDIYA...तब मैंने मोटरसाइकिल रोकी और उस बिटिया को रोका...और पूछा क्यों रो रहे हो बेटा..? तो रोते हुए बताई। कि मेले में मम्मी पापा निकले जल्दी जल्दी और चले गए, मैं छूट गयी। तो मैंने बोला तुम चुप हो जाओ ये लो पानी पीओ मैं तुमको तुम्हारे मम्मी पापा के पास ले चलता हूँ। बैग से बोतल निकाल के दिया पानी पिया फिर चुप हुई। फिर मैंने पूछा तुमने अपने घर को देखा है तो बोली, हाँ तो मेने उसको आगे मोटरसाइकिल पर बिठाया और जैसे जैसे वो रास्ता बताती थी वैसे वैसे मोटरसाइकिल लेकर गया और आख़िर कार जहाँ वो बिटिया ले गई।वहाँ पहुचा।तो उस गली में बड़ा गेट लगा था और बंद पर एक छोटा गेट खुला था।
     PYARI SI GUDIYA...तो मैने पूछा बेटा ये तो गेट बंद है।अभी यहाँ से दूर है...? तो बोली इस गेट को पार करके मेरा घर है।फिर मैंने मोटरसाइकिल लॉक करके उस गेट में बिटिया को ले कर जा ही रहा था तो एक महिला दिखी उनसे मैंने पूछा कि ये बिटिया को पहचानती हो। तो महिला बोली हाँ यह लड़की शायद सामने वाली गली में रहती है। तो उस महिला ने एक लड़के को भेज के उनके घर वालो को बुलवाया। तो लड़की के दादा जी दादी जी सभी आये।और लड़की अपने दादी के पास गई। फिर दादी ने बिटिया से पूछा कि तेरी मम्मी पापा कहाँ है। तो हमने बताया ऐसे ऐसे बात है।
      PYARI SI GUDIYA...तब उसके दादा जी ने अपने बेटे को फोन किया फिर 15 मिनट बाद वो लोग आए। वो पति पत्नी मेले में बिटिया को खोज रहे थे। और बिटिया घर पहुँच चुकी थी।फिर उसके माता पिता आये। तो वो बताये की कोई चीज लेने के ज़िद्द में ये दुकान पर रह गई थी।और थोड़ी देर बाद जब हम दुबारा गये तो यह मिली नही। खैर जो भी था बिटिया अपने फैमिली को मिल गयी थी।हमे खुशी इस बात की थी और टाइम भी 11 बज गया था। फिर उसके सभी फैमिली वाले हमे धन्यवाद किये। और हमने भी बोला कि भाई बच्चों को लेकर जाओ तो ध्यान रखो।और अगर तुम लोग नही मिलते तो मैं थाने जा कर सारी बात लिखवा कर बिटिया को अपने घर ले जाता। क्यों कि ऐसे मैं कही छोड़ थोड़ी सकता था।उसके बाद राम राम करके मैं अपने घर आया।
     PYARI SI GUDIYA...तो प्यारे साथियों कभी भी कहीं भी जाये तो अपने फैमिली बच्चों का विशेष ध्यान रखे। और अगर कहीं ऐसे कोई बच्चा दिखे तो उसकी पूरी तरह से मदद करे। क्यों कि अगर कहीं गलत हाथ में लग गए तो उनका भविष्य ख़राब हो जायेगा।
             "धन्यवाद"

@Amit anant
        Delhi

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