VIPRIT PARISTHTI

विपरीत परिस्थिति...

BY AMIT ANANT
       
    VIPRIT PARISTHTI...इंसान की बड़ी अजीब मनोवृत्ति है प्राकृतिक के बनाये हुए नियमो के माध्यम से हर एक वस्तु को समय के अनुसार एवं आवश्यकता अनुसार उपयोग में लाना चाहिए। परन्तु इंसान हर एक वस्तु को अपने नियमानुसार एवं विपरीत समय एवं माध्यम से इस्तेमाल करते है और सदैव ही इंसान उल्टे तरह से ही कार्य करते है।

      आइये देखते है कैसे...?

कपड़े तन ढकने के लिए होते है,
दिखाने के लिए नही।...परन्तु दिखाया जाता है।

पैसा जरूरत के लिए होता है,
रखने के लिए नही।...परन्तु सदैव रखा जाता है।

इंसान इंसानियत के लिए होते है,
खुदगर्जी के लिए नही।...परन्तु खुदगर्जी होते है।

पूजा पाठ ईस्वर के लिए होते है,
धन दौलत के लिए नही।...परन्तु धन दौलत के लिए करते है।

आग उजाले के लिए होती है,
लगाने के लिए नही।...परन्तु लगाया जाता है।

पानी पीने के लिए होता है,
फैलाने के लिए नही।...परन्तु फैलाया जाता है।

फूल खुशबू के लिए होते है,
तोड़ने के लिए नही।...परन्तु तोड़ा जाता है।

वादे निभाने के लिए होते है,
तोड़ने के लिए नही।...परन्तु वादे तोड़ते है।

साँसे लेने के लिए होती है,
घुटने के लिए नही।...परन्तु घुटते है।

दिल धड़कने के लिए होता है,
तड़पने के लिए नही।...परन्तु तड़पते है।

मोहब्बत करने के लिए होती है,
दिखाने के लिए नही।...परन्तु दिखाते है।

हालात समझने के लिए होते है,
समझाने के लिए नही।...परन्तु समझाते है।

ज़िन्दगी जीने के लिए होती है,
मरने के लिए नही।...परन्तु मरते है।

दिल प्यार के लिए होता है,
तोड़ने के लिए नही।...परन्तु दिल तोडते है।

एहसास समझने के लिए होता है,
बोलने के लिए नही।...परन्तु बोलते है।

नज़रे मिलाने के लिए होते है,
झुकाने के लिए नही।...परन्तु झुकाते है।

वृक्ष छाये के लिए होते है,
काटने के लिए नही।...परन्तु काटते है।

हौसला बढ़ाने के लिए होता है,
गिराने के लिए नही।...परन्तु गिराते है।


      VIPRIT PARISTHTI...प्राकर्तिक के बनाये हुए नियमो के अनुसार नही चलने की वजह से ही तो बहुत सारी परेशानिया आती रहती है परन्तु समझ नही पाते है। जैसे तरह तरह के हारी विमारी, भूकंप, बाढ़,कोरोना इत्यादि।

   VIPRIT PARISTHTI...सभी को हर समय कोई ना कोई संकेत मिलता रहता है उसके उपरान्त भी इंसान समझना जरूरी नही समझता है और उसका दुष्परिणाम भी भुगतना पड़ता है बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितिया है।

  "धन्यवाद"

@Amit anant
        Delhi

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