EK AJEEB EHSAS

एक अजीब एहसास

BY AMIT ANANT

कोई तो आस पास में रहता है

मेरा दिल मुझ से भी कहता है

कौन है?जो मुझको चाहता है

क्यों छुप छुप करके देखता है

शायद उसको मेरे से मिलना है

बात मुझ से कुछ तो कहना है

कोई हो सकता है अपना भी

या तो मैं देखता हूँ सपना भी

उसे कोई तो बात होगी मुझसे

शायद मुलाकात भी हो मुझसे

जब मिलेंगे तो देखूंगा उसको

बात क्या है पूछुंगा मैं उसको

क्यों मेरा पहरेदारी करता है 

क्यों मेरे आस पास रहता है।।

     EK AJEEB EHSAS...एक अजीब एहसास है ये एहसास मुझे बचपन से हर पल महसूस होता है कि कोई तो मेरे आस पास में रहता है और यह महसूस केवल खाली समय मे होता है जब मैं बिलकुल खाली हो कर आराम में होता था तभी ऐसा प्रतीत होता है कि कोई तो है जो मुझ से कुछ कहना चाहता है लेकिन कौन है..?धीरे धीरे समय के ज़िन्दगी चलता रहा और पढ़ाई भी चल रही थी और पढ़ाई के दौरान अचानक एक दिन पिता जी का स्वर्गवास हो गया।

      EK AJEEB EHSAS...तब बहुत सारी जिम्मेदारी हमारे ऊपर आ गयी फिर क्या पढ़ाई छोड़नी पड़ी और नौकरी के लिए निकलना पड़ा क्यों कि घर का बड़ा होने के नाते सारी जिम्मेदारिया निभानी थी अब नौकरी के चक्कर मे गाँव छोड़ कर शहर की तरफ निकल लिया और शहर आकर छोटी मोटी नौकरी की तलाश शुरू किया और कुछ दिनों के बाद एक नौकरी मिल गयीं। और अब और ज्यादा जिम्मेदारी हो गई परन्तु फिर भी जब खाली समय हो तो एहसास होता था।

      EK AJEEB EHSAS...कि कोई तो आसपास में रहता है यही बार बार मुझे महसूस होता था जब महसूस होता था तो मैं सोचता था कि कौन है जो मेरे आसपास है और क्यों छिप छिप के हमे देखता है। और क्या चाहता है शायद उसको मेरे से कोई काम होगा या मिलना चाहता होगा और मिल के कुछ कहना चाहता होगा। यही सब सोच कर छोड़ देता था जब जब महसूस हो मुझे तब तब मेरे जहन में यही बात आती थी। फिर सोचता था की शायद कोई अपना हो सकता है पर फिर सोचता था शायद कोई सपना हो जो मैं खुली आँखों से देख रहा हु या फिर कहीं मेरा कोई भ्रम तो नही है। ख़ैर समय धीरे धीरे गतिमान था वक्त के साथ चलता रहा।

      EK AJEEB EHSAS...एक दिन कुछ ज्यादा ही महसूस होने लगा तो मैंने सोचा कि शायद अब मुलाकात होगी।शायद अब बात होगी और जब भी मुलाकात हुईं तब उससे पूछता हूँ कि क्या बात है क्यों मेरी पहरेदारी कर रहा है..? क्यों मेरे आस पास रहता है...?तुम हो कौन हो..?

     EK AJEEB EHSAS...एक दिन अचानक संध्या के समय मैं ध्यान करने के लिए बैठ गया और आँख बंद करके एकाग्रतापूर्वक ध्यान करने लगा तो हमे एहसास होने लगा कि ये जो भी हमे महसूस होता है वो कुछ बातें समझ मे आने लगी फिर तो रोज रोज ध्यान करने लगा क्यों कि हमे उन बातों को समझना था कि आख़िर है क्या.? जो इतने सालों से हमे महसूस होता है तो जाकर समझ मे आया कि ये तो मेरा ही अस्तित्व है जो मेरा हरदम हर तरह से ख्याल रखता है।

      EK AJEEB EHSAS...सभी के जीवन मे अस्तित्व का महत्वपूर्ण अभिनय होता है इस लिए कभी भी कुछ भी करना पर कभी भी अपने अस्तित्व को मिटने मत देना। क्यों कि अस्तित्व नही है तो कुछ भी नही है इस लिए सदैव अपने आप को समझने की कोशिश  करना और अपने जीवन को सुखमय बनाना।।

                     धन्यवाद

@Amit anant
         Delhi

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