APNO KA BHAROSA
अपनो का भरोसा
BY AMIT ANANT
09/02/2019
कविता
जब कोई अपना समझता है।
दिल मेहरबा हो जाता है,
जब कोई अपना समझता है।।
देखो तो एहसास होगा,
की सभी अपना मानते है।
कि दिखावा करके ऊपर से,
अंदर से गैर मानते है।
नही कोई जहां में अपना,
ये तो हम सभी जानते है।
फिर भी आदत से है मजबूर,
ये सब हम नही मानते है।
इस्तेमाल कर के ये दुनिया,
सभी को जी से मसलता है।
दिल मेहरबा हो जाता है,
जब कोई अपना समझता है।।
हम सभी एक दूसरे के लिए,
एक दूसरो को तानते है।
कि जब भी कुछ कहो लोगों से,
लोग हम सब को टांगते है।
दुनिया बहुत मतलबो की है,
ये तो हम सभी जानते है।
दिखता सब कुछ है सभी को,
पर हम तो नही मानते है।
इंसान जरूरत की मशीने,
बनते है सभी समझता है।
दिल मेहरबा हो जाता है,
जब कोई अपना समझता है।।
जिसे दिल से हम सभी हर पल,
अपना रहनुमा मानते है।
वही सब हमारी कमियों को,
सब बखूबी से जानते है।
फ़रिश्ता वो जिसको हम अपना,
हर दम दिल से मानते है।
झपकते ही वही आंखों को,
पीठ में खंज़र डालते है।
ये सब तोड़ते है भरोसा,
किसको अपना समझता है।
दिल मेहरबा हो जाता है,
जब कोई अपना समझता है।
मुश्किल आसा हो जाता है,
जब कोई अपना समझता है।
दिल मेहरबा हो जाता है,
जब कोई अपना समझता है।।
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Delhi
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