DARD KA EHSAS
"दर्द का एहसास"
BY AMIT ANANT
कविता
08/02/2019
तुम लोग पीड़ा से भर गये।
उस दर्द को समझ ना पाये,
माँ बाप जो पीड़ा हर गये।।
जरा उस धरती माँ को पुछो,
सीना फाड़ के अन दिया है।
जरा उस अपनी माँ से पुछो,
तन को फाड़ के तन दिया है।।
अपने पिता के दिल से पुछो,
मेहनत कर के धन दिया है।
जरा उन हवाओं को पूछो,
सब को ताड जीवन दिया है।।
इन लोगों ने मिल कर हम पर,
हजारों का कर्जा कर गये।
जब चोट लग गयी तुमको तो,
तुम लोग पीड़ा से भर गये।।
कभी उन सब पौधों से पुछो,
जिसको तुम रोज दुखाते हो।
कभी उन सब फूलो से पुछो,
जिसको तुम रोज तोड़ते हो।।
कभी उन सब लोगो से पुछो,
जिसको तुम रोज सताते हो।
कभी उन सब आंखों से पुछो,
जिसको तुम रोज रुलाते हो।।
बेवजह उन सभी फूलो को,
तुम सभी पत्थर पर धर गये।
जब चोट लग गयी तुमको तो
तुम लोग पीड़ा से भर गये।।
@Amit anant
Delhi
My Insta:-
https://www.instagram.com/amit_ananat
My Blog:-
https://amitananat.blogspot.com/
My twitter:-
https://twitter.com/Amitkanant
My Fb Page:-https://www.facebook.com/Amitananatwriter/
My Fb Page:-https://www.facebook.com/Amitananat/
My Youtube:-https://youtube.com/c/amitanantw

Comments
Post a Comment