DARD KA EHSAS

"दर्द का एहसास"

BY AMIT ANANT

          कविता

       08/02/2019

जब चोट लग गयी तुमको तो,
 तुम लोग पीड़ा से भर गये।
उस दर्द को समझ ना पाये,
माँ बाप जो पीड़ा हर गये।।

जरा उस धरती माँ को पुछो,
सीना फाड़ के अन दिया है।
जरा उस अपनी माँ से पुछो,
तन को फाड़ के तन दिया है।।

अपने पिता के दिल से पुछो,
मेहनत कर के धन दिया है।
 जरा उन हवाओं को पूछो,
सब को ताड जीवन दिया है।।

इन लोगों ने मिल कर हम पर,
  हजारों का कर्जा कर गये।
जब चोट लग गयी तुमको तो,
तुम लोग पीड़ा से भर गये।।

कभी उन सब पौधों से पुछो,
जिसको तुम रोज दुखाते हो।
कभी उन सब फूलो से पुछो,
जिसको तुम रोज तोड़ते हो।।

कभी उन सब लोगो से पुछो,
जिसको तुम रोज सताते हो।
कभी उन सब आंखों से पुछो,
जिसको तुम रोज रुलाते हो।।

बेवजह उन सभी फूलो को,
तुम सभी पत्थर पर धर गये।
जब चोट लग गयी तुमको तो
तुम लोग पीड़ा से भर गये।।

@Amit anant
         Delhi

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