ZINDAGI SUN!

"ज़िन्दगी सुन!"

BY AMIT ANANT

ये ज़िन्दगी सुन ले मेरी बात तू जितना मर्जी,
दर्द दे ले फिर भी तुम्हे मैं जी कर दिखाऊँगा।

तेरा काम होता है हर मोड़ पर हमें दर्द देना,
तेरे दिए हुए दर्द को मैं सह कर दिखाऊँगा।

तेरे हर एक फितरत को जानते है यह दुनिया,
फिर भी तेरे फितरत में मैं रह कर दिखाऊँगा।

तुम जरूरत से ज्यादा तेज बनती हो हरदम,
पर तुम्हें एक दिन तो मैं पक्का समझाऊँगा।

तुम कितनी स्वार्थी सी बन गयी हो दुनिया मे,
इसका मज़ा तुम्हें एक दिन सच में चखाऊंगा।

तेरी ख्वाहिश बहुत बड़ी बड़ी होती है हरदम,
तेरी इस ख्वाहिश को मैं पूरा कर दिखाऊँगा।

चाहे तेरी हर चाह को मैं ना काम करना पड़े,
तुझे मैं अपने ही हिसाब से जी कर दिखाऊँगा।।

     ZINDAGI SUN...ये ज़िन्दगी तू कान खोल कर सुन ले..! तू जितनी मर्जी मुझको दर्द दे ले ........पर तू मुझको हरा नही पायेगी। तुझको मैं अपनी मर्जी से जी कर दिखाऊँगा। तेरा काम होता है हर मोड़ पर हर एक को दर्द देना पर तेरे दिए हुए हर दर्द को हँस कर अपने हिसाब से तेरे दर्द को सह कर दिखाऊँगा।
    ZINDAGI SUN...ये ज़िन्दगी तेरी फ़ितरत को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ।और तेरे फ़ितरतो के बीच मे हँस कर और सबको हँसा कर रह कर दिखाऊँगा। और वैसे भी तू जरूरत से ज्यादा तेज बन जाती हो और अपनी जिद दिखाती हो पर मैं तुमको एक दिन पक्का समझाऊँगा। और तुम्हारे जिद को तोड़वाउगा। 
     ZINDAGI SUN...ये ज़िन्दगी तू हरदम स्वार्थी बन के रहती हो और ईर्ष्या करती हो सिर्फ अपना ही भला चाहती हो दूसरों का कोई ख्याल नही होता तुझे इस लिए तुम्हे एक दिन इसका भी मजा चखाऊगा। तू चिन्ता मत कर ज़िन्दगी तेरी ख्वाहिशे बहुत बड़ी बड़ी है ना उस ख्वाहिश को पूरा करके दिखाऊँगा। चाहे तेरी हर चाह को ना काम करना पड़े मुझको तो भी उसे मैं अपने ही हिसाब से ही जी करके दिखाऊँगा। 
     ZINDAGI SUN...ये ज़िन्दगी तू जितना मर्जी कोशिश कर फिर भी मैं तेरे हिसाब से नही..??मैं अपने केवल अपने हिसाब से ही जी कर दिखाऊँगा। और मैं तेरे बहकाए में नही आऊँगा मैं अपने हिसाब से ही तुझे चलाऊँगा।


       ZINDAGI SUN...साथियों हम सभी की ज़िन्दगी अपने अनुसार से जीना चाहती है और पूरे सुख सुविधा के अनुसार रहना चाहती है।परंतु हम कोशिश करेंगे तो ये ज़िन्दगी केवल हमारे अनुसार से ही चाहेगी जैसे हम चाहेगें वैसे चलेगी।
      ZINDAGI SUN...इस ज़िन्दगी को हमे अपने अनुसार से सदैव जीना चाहिए क्यों कि अगर हम इस ज़िन्दगी के अनुसार से जीयेंगे तो हरदम परेसान ही रहेंगे।इस लिए सदैव इसको अपने ही अनुसार से जीने में अच्छाई होती है।

                                "धन्यवाद"

@Amit anant
        Delhi

Comments

  1. बहुत सुन्दर रचना सकारात्मक सोच के साथ
    उम्दा सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई भैया

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